प्रदोष — तिथि, समय और महत्व

प्रदोष व्रत (प्रदोषम) त्रयोदशी तिथि को, महीने में दो बार आता है। इसे प्रदोष काल — सूर्यास्त के आसपास लगभग दो घंटे की संध्या अवधि — में उपवास और भगवान शिव की पूजा के साथ मनाया जाता है। जिस वार को यह पड़ता है उससे विशेष महत्व जुड़ता है, जैसे सोमवार को सोम प्रदोष।

FAQ

प्रदोष व्रत क्या है?

प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि का उपवास है, जो संध्या के प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के साथ रखा जाता है।

प्रदोष काल कब होता है?

प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास लगभग डेढ़ से दो घंटे की अवधि है, इसलिए यह आपके शहर के सूर्यास्त के अनुसार बदलता है।

सोम प्रदोष क्या है?

सोम प्रदोष वह प्रदोष व्रत है जो सोमवार को पड़ता है और शिव पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

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